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रसायन यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ - शरीर और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की सेहत के लिठरसायन यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ नहीं करना चाहिà¤à¥¤
​मीठे पेय पदारà¥à¤¥
हाई फà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤œ पेय पदारà¥à¤¥ या रिफाइंड शà¥à¤—र से बनी हà¥à¤ˆ चीजों जैसे कोलà¥à¤¡ डà¥à¤°à¤¿à¤‚क, सोडा, फà¥à¤°à¥‚ट जूस आदि आपके लिठकितनी खतरनाक है। इस पर ढेरों रिसरà¥à¤š हो चà¥à¤•ी है। यह ना केवल डायबिटीज की समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा कर सकती हैं। बलà¥à¤•ि यह मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के लिठà¤à¥€ उतनी ही खतरनाक हैं।
इसके सेवन से याददाशà¥à¤¤ à¤à¥€ कमजोर होती है और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सीखने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर à¤à¥€ इसका असर पड़ता है। वहीं कई शोध यह à¤à¥€ बताते हैं कि यह बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर की वजह à¤à¥€ बन सकते हैं। इससे पहले यह आपको पूरी तरह नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाठइनà¥à¤¹à¥‡ आज ही अपनी जिंदगी में से निकालकर बाहर फेंक दे।
​जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मरà¥à¤•री वाली मछली
मरà¥à¤•री के à¤à¤• नà¥à¤¯à¥‹à¤°à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤• ततà¥à¤µ है जिसका बहà¥à¤¤ बà¥à¤°à¤¾ असर गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠऔर छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर होता है। आमतौर पर यह पदारà¥à¤¥ हमें बड़ी मछलियों से ही मिलता है जैसे शारà¥à¤• और सà¥à¤µà¥‹à¤°à¥à¤¡à¤«à¤¿à¤¶à¥¤ अगर आप à¤à¥€ इस तरह की फिश का सेवन करते हैं तो इसे बेहद सीमित कर दें।
​à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¥‡à¤®
यह à¤à¤¸à¥€ खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ हैं जिनà¥à¤¹à¥‡ बनाने के लिठआरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤² शà¥à¤—र का उपयोग किया जाता है। शà¥à¤—र फà¥à¤°à¥€ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ à¤à¥€ इसी की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आते हैं। इस तरह के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को अधिक नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाते हैं। हालांकि कम मातà¥à¤°à¤¾ में इनका सेवन सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना जाता है। लेकिन आप अगर इनके सेवन से दूर रहें तो बेहतर होगा।
​पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ फूड
यह फूड आज के समय की सबसे बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ है। à¤à¤¸à¥€ खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तैयार करने के लिठना जाने कितनी ही पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पड़ता है। इसमें जंक फूड, रेड मीट और पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ मीट आदि शामिल हैं। इस तरह के à¤à¥‹à¤œà¤¨ आपको मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और सेहत दोनों के लिठखतरनाक है। मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को तंदà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ बनाठरखने के लिठआप इनसे दूरी बनाकर रखें।
​टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैट
à¤à¤¸à¥€ खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ जिनके अंदर आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤² टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैट मौजूद होता है। यह मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पर à¤à¤• बà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालती हैं। à¤à¤¸à¥‡ कई शोध हैं जो बताते हैं कि टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैट का अधिक सेवन अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤°, खराब याददाशà¥à¤¤ और लोअर बà¥à¤°à¥‡à¤¨ वॉलà¥à¤¯à¥‚म की समसà¥à¤¯à¤¾ का कारण बनता है। कà¥à¤² मिलाकर आपको आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤² टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैट से थोड़ी दूरी बनाकर रखनी होगी।
​रिफाइंड कारà¥à¤¬à¥à¤¸
रिफाइंड कारà¥à¤¬à¥à¤¸ का सेवन आज के समय में बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने लगा है। जिसकी वजह से लोगों के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पर à¤à¥€ असर पड़ रहा है। रिफाइंड कारà¥à¤¬à¥à¤¸ को बनाने में à¤à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का पालन किया जाता है। जिसमें खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ को बनाने के लिठबहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चीनी और केमिकलà¥à¤¸ का उपयोग किया जाता है।
बाजार में मिलने वाली वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ बà¥à¤°à¥‡à¤¡, केक या मैदे से बनी हà¥à¤ˆ चीजें रिफाइंड कारà¥à¤¬à¥à¤¸ के अंदर ही आती हैं। इनके सेवन से डिमेंशिया की समसà¥à¤¯à¤¾ होने लगती है। बता दें कि इनके सेवन से मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की कारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में बाधा उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है और यह फूड लंबे समय तक मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाते हैं। अगर आप अपनी थाली से इनà¥à¤¹à¥‡ हटा दें तो आप टà¥à¤¯à¥‚मर जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ से à¤à¥€ बचे रह सकते हैं।
​अलà¥à¤•ोहल
अलà¥à¤•ोहल का सेवन सीमित मातà¥à¤°à¤¾ के अंदर और कà¤à¥€ कà¤à¥€ किसी दवाई की तरह ही काम करता है। लेकिन इसका अधिक सेवन ना केवल बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर बलà¥à¤•ि कई शारीरिक और मानसिक समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को जनà¥à¤® देती है। à¤à¤¸à¥‡ में इसका à¤à¤²à¥à¤•ोहल का अधिक सेवन सà¤à¥€ के लिठहानिकारक होता है खासतौर से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं के लिà¤à¥¤
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